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कश्मीर से मजदूरों का पलायन, भुखे प्यासे बेटिकट चलने को मजबूर


जम्मू कश्मीर में बिहार वासीयों की हत्या के बाद वहां रह रहे मजदूर काफी सहमे हुए हैं। वे अब पलायन करने को मजबूर हो गए है। जम्मूतवी रेलवे स्टेशन पर भारी संख्या में प्रवासी मजदूरों की भीड़ बढ़ने लगी है। हर कोई अपने घर लौटना चाह रहा है। जम्मू से बिहार के लिए तीन ट्रेनों का परिचालन हो रहा है। वहां से लौटे प्रवासियों ने कहा कि मालिक पैसे भी नहीं दे रहे है। मांगने पर गाली गलौज किया जाता है। किराये के कमरे से भी निकाल दिया।


भूखे पेट आने को मजबूर हैं


कई प्रवासी बिना टिकट के ही आने पर मजबूर है। वहीं, कई लोगों को कश्मीर से जम्मू तक आर्मी के जवानों में पहुंचाया। फिर, पर्ची दिलाकर रवाना किया। इसके बाद ट्रेन में टीटीई व पुलिस फाइन काटने के नाम पर बचे खुचे पैसे भी ऐंठ लेती है। वहीं, कश्मीर से लौटे इम्तियाज ने बताया कि जो भी पॉकेट में 100- 200 बचे थे। वे टीटीई और पुलिस ने ले लिया। ​​​​​​​भूखे पेट आने को मजबूर हैं। रविवार देर रात मुजफ्फरपुर जंक्शन पर पहुंची मौर्यध्वज सुपरफास्ट एक्सप्रेस पहुंच थी। उसमें 50 से अधिक प्रवासी मजदूर जम्मू कश्मीर से बिहार पहुंचे। इस दौरान वह डरे और सहमे दिखाई दिए।


ईट के भट्टे पर काम कर रहे थे मालिक ने बकाया नहीं दिया


मौर्यध्वज एक्सप्रेस से मुजफ्फरपुर जंक्शन उतरे प्रवासी मजदूरों ने कहा है कि उनको जान का खतरा है। मजदूरों का कहना है स्थित ऐसी है कि उनके पास कोई जमापूंजी भी नहीं है। कुछ ने आरोप लगाया कि जिस ईंट के भट्टे में वे लोग काम करते थे। वहां के मालिक ने उनका बकाया पैसा भी नहीं दिया। उसके बिना ही वे लोग घर लौटने को मजबूर हैं।


रून्नीसैदपुर प्रखंड के रैनविशुनी पंचायत के माधोपुर चौधरी गांव के मजदूर जम्मू कश्मीर के बटगांव में एक ईंट भट्ठा में ईंट बनाने का काम करते थे। ​​​​​​​सीताराम मांझी, विनोद मांझी, शिवजी माझी, राधे मांझी, महेश माझी, मनोज माझी, इंद्रजीत माझी, मेघु मांझी, चंदर माझी, रितेश मांझी, आजय माझी, भोला माझी, बागीश माझी ने बताया कि मजूदरों की हत्या की खबर मिलते हीं उन लोगों ने घर वापस लौटने का फैसला कर लिया। ईंट भट्ठा मालिक से बात की। इसके बाद हमलोग बगैर मजदूरी का हिसाब किए ही घर की राह पकड़ ली।

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