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बिहार के शिक्षा का गिरता स्तर वेंटिलेटर पर बिहार की कई यूनिवर्सिटी,कुलपति और रजिस्ट्रार की भारी किल


बिहार के शिक्षा का गिरता स्तर वेंटिलेटर पर बिहार की कई यूनिवर्सिटी,कुलपति और रजिस्ट्रार की भारी किल्लत,एक कुलपति को 3 यूनिवर्सिटी का प्रभार बिहार में हायर एजुकेशन (Higher Education) ​में शिक्षकों की किल्लत से हर कोई वाकिफ है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि बिहार में सिर्फ प्रोफेसर की ही कमी नहीं है, बल्कि यूनिवर्सिटी के शीर्ष पदों पर भी प्रभार के जरिए काम चलाया जा रहा है. एक कुलपति के भरोसे राज्य के तीन तीन यूनिवर्सिटी का कामकाज हो रहा है. यहां सिर्फ बात कुलपतियों के प्रभारी को लेकर नहीं है बल्कि रजिस्ट्रार जैसे अहम पद भी खाली हैं.

तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय (टीएमबीयु) के कुलपति का प्रभार बाबा भीमराव अंबेडकर बिहार विश्वविद्यालय मुजफ्फरपुर के कुलपति प्रो. हनुमान प्रसाद पांडेय को दिया गया है ये वहीं कुलपति है जो बीआरएबीयु में लगभग दो साल से पदासीन रहते कभी युनिवर्सिटी झांकने नहीं आये,अपने दफ्तर का कायाकल्प (रेनोवेशन) कराने की बात कहकर घर से युनिवर्सिटी चलाते रहें है बिआरएबीयु मुजफ्फरपुर के बदहाली का ये हाल है की छात्र छः साल में ग्रेजुएशन कर ले तो गनीमत है छात्र छात्राएं हलकान परेशान है कोई परीक्षा समय पर नही हो पा रहा है। स्नातक 2019-20-21 तीन सत्र का पार्ट वन परीक्षा नही हुआ है लाखो छात्र छात्राएं व उनके परिजन उहापोह की स्थिति में है अभी चंद दिन से कुलपति महोदय अपने कार्यालय आने लगे थे ,की उनको भागलपुर युनिवर्सिटी का भी प्रभार सौंप दिया गया कौन से उपलब्धि पर पता नहीं। फिल्हाल प्रो हनुमान पांडे तीन दिन भागलपुर और तीन दिन मुजफ्फरपुर में कार्य देखेंगे।

दुसरी तरफ प्रोफेसर सुरेंद्र प्रताप सिंह ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय के कुलपति हैं. लेकिन इसके साथ ही उनके ऊपर पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय और आर्यभट्ट ज्ञान विवि के भी कुलपति की जिम्मेदारी है. आर्यभट्ट ज्ञान विवि की वेबसाइट पर बकायदा उनके पद के साथ-साथ प्रभारी लिखा हुआ है. इसी तरह प्रोफेसर एसपी सिंह पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के पिछले कई महीनों से प्रभारी वीसी बने हुए हैं. जिम्मेदार झाड़ रहे पल्ला यूनिवर्सिटी में शीर्ष पदों पर रखे गए प्रभारियों को लेकर संबंधित विभागों के अधिकारी और मंत्री की दलील अजीबो-गरीब है. दरअसल नियमों के अनुसार कोई भी पद अचानक खाली नहीं होता और खाली होने से पहले हीं उसकी प्रक्रिया शुरू कर दी जाती है, लेकिन यहां क्या हो रहा है? इस सवाल का जवाब कोई देने के लिए तैयार नहीं है. बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री विजय कुमार चौधरी ने कहा कि कुलपतियों की नियुक्ति के लिए एक निर्धारित प्रक्रिया है. बीच में कहीं भी रिक्ति होती है तो प्रभार दिया जाता है, जहां पद खाली पड़े थे, वहां प्रभारी के रूप में काम चलाया जा रहा है. रजिस्ट्रार की पीड़ा वहीं, इस समस्या को लेकर आर्यभट्ट ज्ञान यूनिवर्सिटी के प्रभारी रजिस्ट्रार डॉ. पीके सिंह ने बताया, 'मैं मगध विश्वविद्यालय का मूल रूप से रजिस्ट्रार हूं, लेकिन मेरी जिम्मेदारी एकेयू की भी है. सप्ताह में तीन दिन मगध विवि तो तीन दिन एकेयू का भी काम देखना पड़ता है.

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