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  • Ali Haider

माँ बगलामुखी मंदिर के महंत का निधन: समाज ने जताया शोक भक्तो की भीड़ के बीच नही खुले मंदिर के पट


मुजफ्फरपुर शहर के कच्ची सराय स्थित प्रसिद्ध मां बगलामुखी पीताम्बरी सिद्धपीठ मंदिर के महंत 60 वर्षीय अजित कुमार का आज सुबह करीब पांच बजे निधन हो गया। वे तीन महीने से बीमार चल रहे थे। उन्हें पिछले वर्ष दिसंबर में ब्रेन हेमरेज हुआ था। पटना के पारस हॉस्पिटल में उनका इलाज हुआ। एक महीने बाद स्वस्थ होकर घर लौटे। लेकिन, इसके बाद भी उन्हें परेशानी हो रही थी। दोबारा इलाज कराने पटना के रुबन हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे। उनके ब्रेन में ब्लड क्लॉट कर रहा था। इलाज के बाद डॉक्टरों ने कहा कि अब उन्हें बचाना मुश्किल है। आपलोग घर ले जाइए। शनिवार शाम को उन्हें लेकर घर आ गए। आज सुबह उन्होंने अंतिम सांस ली।

महंत अजित कुमार अपने पीछे पत्नी विभा देवी, पुत्र करन प्रताप, देवराज प्रताप और एक बेटी का भरापूरा परिवार छोड़ गए। महंत जी के निधन की खबर सुनते ही भक्तों, महंत समाज, पंडित और नेताओं में शोक की लहर दौड़ गई। अंतिम दर्शन को सैकड़ों लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। मां बगलामुखी मंदिर से ही उनकी शव यात्रा निकाली जाएगी। उनके निधन पर बाबा गरीबनाथ मंदिर के प्रधान पुजारी पंडित विनय पाठक, सांसद अजय निषाद, पूर्व मंत्री सुरेश शर्मा, पूर्व विधायक बेबी कुमारी, महंत अभिषेक पाठक, BJP नेता प्रभात कुमार और RJD प्रवक्ता ईकबाल मोहम्मद शमी अध्यक्ष रमेश गुप्ता JDU नेता कुंदन कुमार ने शोक जताया। प्रधान पुजारी और सांसद ने कहा कि यह अकल्पनीय क्षति है। पूरा शहर शोक में डूबा हुआ है।


250 वर्ष पूर्व हुई थी मंदिर की स्थापना


मां बगलामुखी मंदिर की स्थापना आज से 250 वर्ष पूर्व हुई थी। महंत अजित कुमार के परदादा रूपल प्रसाद ने इस मंदिर की स्थापना की थी। तब से लेकर आज तक उनका परिवार इस मंदिर की सेवा कर रहा है। इस मंदिर में स्थापित माता की मूर्ति अष्टधातु की है, जो 10 भुजा स्वरूप में हैं। मां बगलामुखी की मूर्ति के ठीक नीचे 'सहस्त्र दल महायंत्र' स्थापित है। इस यंत्र पर 108 महाविद्यालयों की साधना की जाती है

तांत्रिकों का लगता है मेला

नवरात्र हो या आम दिन यहां तांत्रिकों का मेला लगता है। नवरात्र में देश भर से तांत्रिक यहां पर साधना करने आते हैं। मां बगलामुखी में भक्तों की असीम श्रद्धा है। कहते हैं कि मां के दर्शन मात्र से सभी मनोकामनाएं पूरी होती है। मां को हल्दी, दही और दुब चढ़ाया जाता है। वैसे तो हर दिन मां के दर्शन के शुभ दिन माने जाते हैं। लेकिन, गुरुवार का दिन अति शुभ माना गया है। इस दिन भक्तों की विशेष भीड़ रहती है। मंदिर के भीतर मां तारा, त्रिपुर सुंदरी और भैरव समेत अन्य भगवानों के भी छोटी-छोटी मंदिर और प्रतिमएं हैं।

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