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यूं ही नहीं शाही लीची की राजधानी है मुजफ्फरपुर, इन राज्यों में भी यह करती है राज


मुजफ्फरपुर लीची को फलों की रानी (Queen of fruits)कहा जाता है. मतलब फलों में आम के बाद लीची की ही बादशाहत है. या यूंं कहिए फलों की सत्ता बेशक आम के पास हैं, लेकिन इस सल्तनत की महारानी तो लीची ही है. असल में लीची को सबसे रसीले फलों के तौर पर जाना जाता है. इसमें अगर शाही लीची (लीची की सर्वोत्तम किस्म) सामने हो तो खाने वालों के भाग्य ही खुल जाते हैं. इसी शाही लीची (Shahi Litchi) की राजधानी बिहार के मुजफ्फरपुर (Muzaffarpur) को कहा जाता है, लेकिन देश में ऐसे अन्य राज्य भी हैं, जहां यह शाही लीची बड़ी संख्या में पैदा होती है. आईए जानते हैं कि मुजफ्फरपुर के अलावा ऐसे कौन से राज्य हैं, जहां शाही लीची पैदा होती है. साथ ही मुजफ्फरपुर की शाही लीची क्यों विशेष हैं.


मुजफ्फरपुर को इसलिए कहा जाता है लीचीयों की राजधानी

सबसे पहले बात यहां से शुरू करते हैं कि मुजफ्फरपुर को लीची की राजधानी क्यों कहा जाता है. असल में मुजफ्फरपुर में बहुतायत संख्या में लीची का उत्पादन होता है. डॉ राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय पूसा समस्तीपुर के प्रधान वैज्ञानिक और देश के जाने-माने फल विशेषज्ञ एसके सिंह के अनुसार मुजफ्फरपुर में उगाई जाने वाली विभिन्न किस्मों में लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा शाही लीची का है. इस वजह से मुजफ्फरपुर को शाही लीची की राजधानी कहा जाता है.

मुजफ्फरपुर की शाही लीची में क्या है खास

देश के किसी भी हिस्से में जब भी मुजफ्फरपुर का नाम आता है तो अनायास ही शाही लीची का नाम सामने आ जाता है. इसका विशेष कारण यहां उत्पादित होने वाली लीची का स्वाद है. आलम यह है कि मुजफ्फरपुर की मिट्टी में उगने वाली शाही लीची के स्वाद का मिलान अगर आप बगल के जिले से भी करते हैं तो दोनों के स्वाद और सुंगध में बड़ा अंतर साफ दिखाई देता है.


इन राज्यों में इस नाम से जानी जाती है शाही लीची

बिहार के मुजफ्फरपुर के साथ ही शाही लीची की बड़ी संख्या में पैदावार झारखंड, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के तराई वाले इलाकों में होती है. उत्तराखंड में इसे “शाही” और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में इसे “मुजफ्फरपुर” के नाम से जाना जाता है. यह विभिन्न स्थानों पर मई के दूसरे सप्ताह से जून के पहले सप्ताह के दौरान पकने वाली एक अगेती किस्म है. यह झारखंड में 12-15 मई, उत्तर बिहार में 20 से 25 मई और उत्तरांचल के तराई क्षेत्र में मई के अंत तक पक कर तैयार होती है. यानी बाजार में अभी जो भी लीची नजर आ रही है वह झारखंड की लीची ही है जिसमें अच्छा स्वाद मिलेगा.

पेड़ का आकार

शाही प्रजाति के लीची के पेड़ लगभग 7.5 मीटर ऊंचाई और 8.0 मीटर चारों तरफ फैला हुआ होता है. इसका एक पेड़ 90 से 100 किग्रा उपज देता है. शाही लीची के फल मध्यम से बड़े आकार के होती है. जिसके एक फल का वजन लगभग 20.5 ग्राम होता है. फल का आकार गोल से लेकर हार्ट के आकार में मोटे होते हैं जो पकने पर लाल के साथ गुलाबी दिखाई देते है.

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