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बिहार एमएलसी चुनाव: राजद में बगावत, घोषित प्रत्याशी के खिलाफ कार्यकर्ता उतारेंगे उम्मीदवार जानिए


बिहार विधान परिषद की 24 सीटों पर चुनाव होने जा रहे हैं। इसको लेकर बिहार में राजनीतिक पारा चढ़ा हुआ है। कंपकपाती ठंड में भी राजनीतिक सरगर्मी तेज है। हाल ही में राजद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर बिहार विधान परिषद की कई सीटों पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा की थी। पार्टी ने दरभंगा सीट से शिवशंकर यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है, लेकिन इस फैसले के खिलाफ दरभंगा राजद में बगावत शुरू हो गई है।

पार्टी के कई नेताओं ने इस पर असंतोष जताया है और कार्यकर्ताओं के बीच से घोषित प्रत्याशी के खिलाफ उम्मीदवार खड़ा करने का ऐलान कर दिया है। इससे पार्टी के लिए मुसीबत खड़ी हो सकती है। नेताओं ने आरोप लगाया कि राजद में कुछ लोग पैसे लेकर टिकट बांट रहे हैं। इसकी वजह से पार्टी के कार्यकर्ताओं में गलत संदेश गया है और इसका पार्टी को नुकसान झेलना पड़ेगा।


राजद के वरिष्ठ नेता फ़ैयाल अशीर शम्सी ने कहा कि लालू जी ने गरीब-गुरबों के लिए पार्टी खड़ी की थी। उन्होंने कहा कि उनके पास अगर कोई टिकट मांगने जाता था तो भी सीधे-सीधे उसे चुनाव की तैयारी करने के लिए कहते थे। उस समय पैसे की कोई डिमांड नहीं होती थी। उन्होंने आरोप लगाया कि अब पार्टी में दलाल प्रथा कायम हो गई है। कुछ लोग पैसे का लेनदेन करके टिकट बांट रहे हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लोग राजद को लोजपा और मायावती की पार्टी की तरफ ले जा रहे हैं।

कुछलोग आए और पार्टी को हाईजैक कर लिया: राजद नेता

फ़ैयाल अशीर शम्सी ने कहा कि इन लोगों ने पिछले विधानसभा चुनाव में हेरफेर करके दरभंगा की 10 सीटों पर टिकट बांटा था। नतीजा हुआ कि पार्टी 10 में से 9 सीटें हार गई।

उन्होंने कहा कि ये लोग पार्टी को और कमजोर करने की तरफ ले जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अभी एमएलसी चुनाव में कई पोस्टर वगैरह दिख रहे हैं। कुछ लोग आ गए हैं और पार्टी को हाईजैक कर लिया है। उन्होंने कहा कि ऐसा लगता है जैसे पार्टी यही लोग चला रहे हैं। ये लोग अंबानी-अडानी हो गए हैं और पार्टी में जो चाहेंगे यही लोग निर्णय लेंगे।वहीं, राजद के पूर्व महासचिव लक्ष्मण यादव ने कहा कि अभी चुनाव आयोग ने घोषणा भी नहीं की है और दरभंगा से विधान परिषद की सीट पर उम्मीदवार घोषित कर दिया गया। उन्होंने कहा कि इसका गलत संदेश गया है। उन्होंने कहा कि पार्टी में कुछ लोग मनमानी कर रहे हैं। उन्होंने पार्टी के अधिकारियों से मांग की कि इस फैसले पर पुनर्विचार किया जाए और कार्यकर्ताओं के बीच से एमएलसी उम्मीदवार खड़ा किया जाए। उन्होंने कहा कि पिछले विधानसभा चुनाव में इसी मनमाने तरीके से उम्मीदवार खड़े किए गए थे, जिसका राजद को पूरे मिथिलांचल में खामियाजा भुगतना पड़ा। उन्होंने कहा कि कुछ नेताओं के मनमाने फैसले के खिलाफ अगर पार्टी का कार्यकर्ता आवाज उठाता है तो उसे विद्रोही करार दिया जाता है और उस पर कार्रवाई की जाती है। उन्होंने कहा कि यह पार्टी और लोकतंत्र के हित में नहीं है।

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